Ajay Yadav

तुम चले तो आँधियाँ-तूफ़ान ख़ुद ही चल पड़ेंगे,
सागरों की बात क्या पर्वत बड़े भी ढह पड़ेंगे!
ये न सोचना निशाएँ पथ तुम्हारा रोक लेंगी,
तुम चले तो दीप क्या सूरज हज़ारों जल पड़ेंगे
हम दिल भी जीतेंगे और चुनाव भी।

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