Dewraha Baba Deoria Uttar Pradesh
भारत में इमरजेंसी लगने के बाद पुनः चुनाव हुए थे तब इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं. ऐसा कहा जाता है कि उस दौरान वह भी देवरहा बाबा से आशीर्वाद लेने गई थीं। तब बाबा ने उन्हें हाथ उठाकर पंजे से आशीर्वाद दिया था। ऐसी प्रबल मान्यता है कि वहां से लौटने के बाद ही इंदिरा ने कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा ही तय किया था। फिर इसी चिन्ह पर साल 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रचंड, ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त किया था और वे फिर वापस से देश की प्रधानमंत्री बनी थीं। मचान पर बैठे-बैठे ही बाबा श्रद्धालुओं को धन्य करते थे। कई लोगों का ऐसा दावा है कि भक्तों की बात उनके होंठों तक आने से पहले ही बाबा उनके मन की बात जान लेते थे। यही बाबा की प्रसिद्धि का सबसे बड़ा कारण था।
बाबा दिखते ही दिव्य थे, मौसम कोई भी हो बाबा निर्वस्त्र होते थे उनके शरीर पर सिर्फ मृगछाल होता था जो वह नीचे लपेटते थे। साल 1911 में बाबा के मईल आश्रम पर दर्शन के लिए जार्ज पंचम भी पहुंचे थे. देश के महान विभूति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मदनमोहन मालवीय, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, मुलायम सिंह यादव, वीरबहादुर सिंह, विंदेश्वरी दुबे, जगन्नाथ मिश्र आदि नेताओं सहित प्रशासनिक अधिकारी बाबा का आशीर्वाद लेने उनके आश्रम पहुंचते थे।
जब 1911 में जॉर्ज पंचम भारत आए, तो देवरिया जिले के मइल गांव में बाबा के आश्रम पहुंचे। हालांकि उनके बाबा के बीच क्या बात हुई, उनके शिष्यों द्वारा यह बात कभी जगजाहिर नहीं की गई। चार खंभों पर टिका मचान ही उनका महल था, जहां नीचे से ही लोग उनके दर्शन कर लिया करते थे। साल के आठ महीने वह मइल गांव में ही बिताते थे।
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